📍नई दिल्ली | 3 Jun, 2025, 5:07 PM
IHI XF9-1 Engine for AMCA: भारत के महत्वाकांक्षी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम को लेकर एक नई खबर सामने आई है। जापान ने भारत को उसके AMCA प्रोग्राम के लिए अपने अत्याधुनिक IHI XF9-1 इंजन की पेशकश की है। यह इंजन भारतीय वायुसेना (IAF) के अगले 5.5-जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट को पॉवर दे सकता है। जापान ने इस इंजन के जॉइंट डेवलपमेंट और भारत में ही प्रोडक्शन करने का प्रस्ताव दिया है। इस पेशकश के साथ जापान AMCA के इंजन डेवलपमेंट में सहयोग करने वाला चौथा देश बन गया है।
IHI XF9-1 Engine for AMCA: क्या है AMCA प्रोग्राम?
AMCA भारत का पहला स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट प्रोग्राम है, जिसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) मिलकर डेवलप कर रहे हैं। इसका मकसद भारतीय वायुसेना के पुराने विमानों, जैसे मिग-21 और जगुआर, को रिप्लेस करना है। AMCA एक 5.5-जेनरेशन फाइटर जेट होगा, जो स्टील्थ (रडार से बचने की क्षमता), सुपरक्रूज़ (बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक स्पीड), और मल्टी-रोल मिशन (हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला) करने में सक्षम होगा। इस जेट को 2035 तक पूरी तरह से तैयार करने का लक्ष्य है, और इसके प्रोटोटाइप 2028 तक उड़ान भर सकते हैं।
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लेकिन इस प्रोग्राम की सबसे बड़ी चुनौती है एक ऐसा पावरफुल इंजन ढूंढना है, जो AMCA की जरूरतों को पूरा कर सके। अभी तक AMCA के प्रोटोटाइप में जनरल इलेक्ट्रिक F414 इंजन का इस्तेमाल करने की योजना है, जो 98 kN थ्रस्ट देता है। लेकिन यह एक अस्थायी समाधान है। AMCA के फाइनल वर्जन के लिए भारत को 110-130 kN थ्रस्ट वाले इंजन की जरूरत है, जो सुपरक्रूज़ और स्टील्थ फीचर्स को सपोर्ट कर सके।
जापान का IHI XF9-1 इंजन: क्या है खास?
जापान ने भारत को अपने IHI XF9-1 इंजन की पेशकश की है, जो एक लो-बायपास आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन है। इसे जापान की IHI कॉरपोरेशन और जापान की एक्विजिशन, टेक्नोलॉजी एंड लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) ने मिलकर बनाया है। इस इंजन का प्रोटोटाइप 2018 में तैयार हुआ था और यह 11 टन (107 kN) का ड्राई थ्रस्ट और 15 टन (147 kN) का थ्रस्ट आफ्टरबर्नर के साथ देता है। खास बात यह है कि इस इंजन को और बेहतर बनाया जा सकता है, जिससे यह 20 टन (196 kN) तक का थ्रस्ट दे सके। यह इसे न केवल 5.5-जेनरेशन जेट्स के लिए, बल्कि भविष्य के सिक्स्थ जेनरेशन फाइटर जेट्स के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है।
भारत की गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) AMCA के लिए ऐसा इंजन चाहती है जो 120 kN का थ्रस्ट और 73-75 kN का ड्राई थ्रस्ट दे सके, ताकि सुपरक्रूज संभव हो सके। IHI XF9-1 का ड्राई थ्रस्ट 110 kN के करीब है, जो GTRE की जरूरत से ज्यादा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस इंजन को मॉडिफाई करके भारत की जरूरतों के हिसाब से ड्राई थ्रस्ट को कम किया जा सकता है। वहीं, इसका डिज़ाइन ऐसा है कि यह कम हीट सिग्नेचर (इन्फ्रारेड सिग्नल) छोड़ता है, जो स्टील्थ जेट्स के लिए बहुत जरूरी है। यह इंजन जापान ने अपने अगले-जेनरेशन फाइटर प्रोग्राम के लिए बनाया गया था, लेकिन अब जापान इसे भारत के साथ साझा करने को तैयार है।
जापान का ऑफर: भारत के लिए क्यों खास?
जापान ने यह ऑफर ऐसे समय पर दिया है, जब भारत AMCA के लिए इंजन की खोज में कई देशों से बातचीत कर रहा है। जापान से पहले अमेरिका (GE F414 और F110), फ्रांस (साफरान M88), और ब्रिटेन (रॉल्स-रॉयस) ने भी अपने इंजन ऑफर किए थे। जापान ने कहा है कि वह भारत में इस इंजन का प्रोडक्शन करने और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने को तैयार है। यह भारत की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है। इससे भारत को न सिर्फ इंजन मिलेगा, बल्कि उसे बनाने की तकनीक भी सीखने का मौका मिलेगा।
वहीं, XF9-1 का डिज़ाइन इतना एडवांस्ड है कि यह भविष्य में 6ठी-जेनरेशन फाइटर जेट्स के लिए भी काम आ सकता है। यानी यह एक ऐसा निवेश है, जो भारत को लंबे समय तक फायदा देगा। भारत और जापान पहले से ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा हित साझा करते हैं। दोनों देश चीन की बढ़ती ताकत को संतुलित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। यह सहयोग रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगा।
AMCA प्रोग्राम में अब तक क्या हुआ?
AMCA प्रोग्राम की शुरुआत 2010 में हुई थी। शुरू में इसे 20 टन कैटेगरी का जेट माना गया था, लेकिन अब यह 25 टन कैटेगरी का फाइटर जेट है। 2024 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने इस प्रोजेक्ट के लिए 15,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। डिजाइन का काम 2023 में पूरा हो चुका है, और पहला प्रोटोटाइप 2028 तक तैयार होने की उम्मीद है। बड़े पैमाने पर उत्पादन 2035 तक शुरू होने की संभावना है।
कावेरी इंजन का हाल
भारत ने अपने स्वदेशी कावेरी इंजन प्रोग्राम पर कई सालों से काम किया है, जिसे गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) लीड कर रहा है। लेकिन यह प्रोग्राम अभी तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। कावेरी इंजन जरूरी थ्रस्ट लेवल हासिल नहीं कर पाया, और इसे AMCA जैसे हाई-परफॉर्मेंस जेट के लिए इस्तेमाल करना मुश्किल है। इस वजह से भारत को विदेशी सहयोग की जरूरत पड़ रही है। जापान के साथ सहयोग से भारत को नई तकनीक सीखने का मौका मिलेगा, जो भविष्य में कावेरी प्रोग्राम को भी बेहतर करने में मदद कर सकता है।
हालांकि जापान का ऑफर भले ही आकर्षक हो, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। जापान की रक्षा तकनीक पर सख्त निर्यात नियम हैं, क्योंकि वह शांति का पक्षधर है। हालांकि, खासकर चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी को देखते हुए हाल के सालों में जापान ने इन नियमों में ढील दी है। जापान पहले से ही यूके और इटली के साथ ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) में शामिल है। अगर भारत और जापान इस डील को अंतिम रूप दे देते हैं, तो यह दोनों देशों के बीच एक नई साझेदारी की शुरुआत होगी।
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